Gita Explained
तीन गुण - Kangra miniature

अध्याय १४ / १८

तीन गुण

गुणत्रयविभागयोगः

Guṇa-traya-vibhāga Yoga · २७ श्लोक

प्रकृति में सब कुछ तीन गुणों से बुना है: प्रकाश, गति और जड़ता। ये अच्छे लोगों को भी बाँधते हैं, और बारी-बारी से हावी होते हैं। कृष्ण बताते हैं कि इस समय आप पर कौन-सा गुण हावी है यह कैसे पहचानें, और किसी से भी न खिंचना कैसा होता है।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

मनोदशा और स्वभाव का एक कार्यसाधक मानचित्र। पाठक को अपनी स्थिति देखने का ढंग मिलता है, बिना उसके वश में हुए।

श्लोक

२७ / २७ का अर्थ