Gita Explained

श्रीमद् भगवद् गीता

सभी ७०० श्लोक, ऐसी भाषा में जिसे हर कोई समझ सके।

भगवद् गीता एक ऐसे व्यक्ति और उसके रथ हाँकते मित्र के बीच का संवाद है, जो उठ ही नहीं पा रहा। यहाँ हर श्लोक मूल संस्कृत में है, साथ में सरल अर्थ, रोज़ के जीवन से जुड़ा एक उदाहरण, और उसके पीछे का दर्शन।

Krishna seated with a maroon manuscript, painted in the Kangra miniature style

अध्याय 2, श्लोक 47

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣu kadācanamā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo ’stvakarmaṇi

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, उसके फलों पर कभी नहीं। परिणाम को अपनी प्रेरणा मत बनने दो। और इसे कुछ न करने का बहाना भी मत बनने दो।

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हर श्लोक के साथ आपको क्या मिलता है

०१

मूल पाठ

देवनागरी में संस्कृत, साथ में लिप्यंतरण और शब्द-दर-शब्द अर्थ, जिसे आप चाहें तब खोल सकते हैं।

०२

सरल शब्दों में

इस श्लोक में कृष्ण वास्तव में क्या कह रहे हैं - उनके लिए लिखा गया जिन्होंने गीता कभी नहीं पढ़ी।

०३

आपने इसे कहाँ महसूस किया है

रोज़मर्रा के जीवन से एक ठोस स्थिति - काम, परिवार, बीमारी, असफलता - जो बात को समझा देती है।

०४

और गहराई में

दर्शन: पारिभाषिक शब्द, खींचा जा रहा भेद, और यह पूरी पुस्तक से कैसे जुड़ता है।

अठारह अध्याय

संस्कृत के सभी ७०० श्लोक यहाँ उपलब्ध हैं। अर्थ एक-एक अध्याय करके लिखा जा रहा है।