Gita Explained
पुरुषोत्तम - Kangra miniature

अध्याय १५ / १८

पुरुषोत्तम

पुरुषोत्तमयोगः

Puruṣottama Yoga · २० श्लोक

एक उलटा वृक्ष, जड़ें आकाश में और शाखाएँ नीचे - इस संसार का चित्र जिसमें हम रहते हैं। कृष्ण कहते हैं कि इस पर कुल्हाड़ी चलाओ - संसार पर नहीं, बल्कि उस आसक्ति पर जो आपको उसकी शाखाओं में लटकाए रखती है।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

गीता के तत्त्वदर्शन का सबसे संक्षिप्त पूर्ण कथन, जिसका अन्त उस पर होता है जो नाशवान और अविनाशी दोनों से ऊपर है।

श्लोक

२० / २० का अर्थ