Gita Explained
अर्जुन कहते हैं18.1

संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्।त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन॥

sannyāsasya mahā-bāho tattvam icchāmi veditumtyāgasya ca hṛṣīkeśa pṛthak keśi-niṣūdana

शब्दार्थ
arjunaḥ uvāca: Arjun saidsanyāsasya: of renunciation of actionsmahā-bāho: mighty-armed onetattvam: the truthicchāmi: I wishveditum: to understandtyāgasya: of renunciation of desires for enjoying the fruits of actionsca: andhṛṣīkeśa: Krishna, the Lord of the sensespṛthak: distinctivelykeśī-niṣūdana: Krishna, the killer of the Keshi demon

श्लोक कहता है

कृष्ण, मैं छोड़ने का सच समझना चाहता हूँ। संन्यास असल में क्या है, और त्याग असल में क्या है, और दोनों में फ़र्क़ क्या है।

सरल शब्दों में

अर्जुन आख़िरी सवाल पूछता है, और वह अच्छा सवाल है।

पूरी पुस्तक में दो शब्द चले हैं और उसने भाँप लिया है कि वे एक नहीं हैं। संन्यास काम से हटकर चले जाना है। त्याग काम करना और उसके फल पर दावा छोड़ देना है।

वह चाहता है कि फ़र्क़ साफ़-साफ़ कहा जाए। सत्रह अध्यायों के बाद यह चाहना जायज़ है।

आपने इसे कहाँ महसूस किया है

आपकी भतीजी पूरा सत्र कक्षा में बैठी और ज़्यादातर बात समझी भी। आख़िरी दिन वह हाथ उठाकर पूछती है कि जिन दो शब्दों को शिक्षक पहले हफ़्ते से एक ही अर्थ में बरत रहे हैं, उनमें फ़र्क़ क्या है। आधा कमरा सिर उठा लेता है। किसी और ने यह मानने की हिम्मत नहीं की थी कि उसे भी पक्का पता नहीं। वह पिछड़ी नहीं थी। वह अकेली थी जो अब भी जाँच रही थी।

और गहराई में

शुरू में नहीं, अन्त में परिभाषा माँगना उस आदमी का लक्षण है जो सचमुच सुन रहा था।

दोनों शब्द इतने पास हैं कि घुल जाते हैं। संन्यास पुराना और नाटकीय है: काम रखकर गृहस्थी से चल देना। त्याग शान्त है और उसका अर्थ है छोड़ देना, ख़ासकर उस दावे को जो काम के फल पर होता है।

अर्जुन कौतूहल से नहीं पूछ रहा। उसके सामने ठोस समस्या है। उससे लड़ने को कहा जा रहा है, और वह जानना चाहता है कि छोड़ने का कोई ऐसा रूप है या नहीं जिससे वह इज़्ज़त के साथ बच निकले।

सवाल को ईमानदार यह बनाता है कि वह खुलकर पूछा गया। जिस शब्द पर हमें शक होता है, उसके साथ हममें से ज़्यादातर उलटा करते हैं। हम उसे बरतते रहते हैं, इस उम्मीद में कि अर्थ अपने आप खुल जाएगा, और कभी-कभी पूरा फ़ैसला उसी फ़र्क़ पर टिक जाता है जिसे हमने कभी जाँचा नहीं।