Gita Explained
जो नष्ट नहीं होता - Kangra miniature

अध्याय ८ / १८

जो नष्ट नहीं होता

अक्षरब्रह्मयोगः

Akṣara-brahma Yoga · २८ श्लोक

अर्जुन सीधे-सीधे कई प्रश्न पूछता है कि क्या टिकता है, क्या मरता है, और अन्त में क्या होता है। कृष्ण दीर्घ दृष्टि से उत्तर देते हैं: काल के विशाल चक्र, और अन्तिम क्षण में मन जिस ओर मुड़ता है।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

पैमाना एक जीवन से आगे बढ़ जाता है। मृत्यु तर्क का अन्त न रहकर एक कहीं लम्बी लय का अंश बन जाती है।

श्लोक

२८ / २८ का अर्थ