Gita Explained
खुला रहस्य - Kangra miniature

अध्याय ९ / १८

खुला रहस्य

राजविद्याराजगुह्ययोगः

Rāja-vidyā-rāja-guhya Yoga · ३४ श्लोक

कृष्ण इसे सबसे सीधी और सबसे उदारता से दी गई शिक्षा कहते हैं। सब कुछ उनमें टिका है, फिर भी वे उसमें बँधे नहीं। और द्वार सबके लिए खुला है - एक पत्ता, एक फूल, या सच्चे मन से दिया गया जल ही पर्याप्त है।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

पुस्तक का सबसे समावेशी अध्याय। पहुँच जन्म, विद्या या कर्मकाण्ड पर नहीं, सच्चाई पर निर्भर हो जाती है।

श्लोक

३४ / ३४ का अर्थ