Gita Explained
अर्जुन कहते हैं11.22

रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च ।गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे॥

rudrādityā vasavo ye ca sādhyāviśve ’śvinau marutaś coṣmapāś cagandharva-yakṣāsura-siddha-saṅghāvīkṣante tvāṃ vismitāś caiva sarve

शब्दार्थ
rudra — a form of Lord Shivādityāḥ — the Adityasvasavaḥ — the Vasusye — theseca — andsādhyāḥ — the Sadhyasviśve — the Vishvadevasaśvinau — the Ashvini kumarsmarutaḥ — the Marutsca — anduṣma-pāḥ — the ancestorsca — andgandharva — Gandharvasyakṣa — the Yakshasasura — the demonssiddha — the perfected beingssaṅghāḥ — the assembliesvīkṣante — are beholdingtvām — youvismitāḥ — in wonderca — andeva — verilysarve — all

श्लोक कहता है

रुद्र, आदित्य, वसु और साध्य। विश्वेदेव, दोनों अश्विन, मरुत और पितर। गन्धर्वों, यक्षों, असुरों और सिद्धों के समूह — ये सब आपको देख रहे हैं, चकित।

सरल शब्दों में

ब्रह्मांड के हर एक का नाम गिनाया गया है, और वे सब एक ही काम कर रहे हैं।

वीक्षन्ते त्वां विस्मिताः — वे आपको देख रहे हैं, विस्मित।

देवता और असुर, एक ही वाक्य में, चेहरे पर एक ही भाव लिए।

आपने इसे कहाँ महसूस किया है

किसी पारिवारिक शादी में परिवार की वे दो शाखाएँ, जिनमें पन्द्रह साल से बात नहीं हुई, एक ही कमरे में आ जाती हैं और कोई इसका ज़िक्र नहीं करता। झगड़ा सुलझा नहीं है। वह बस कुछ घंटों के लिए मायने रखने के लिए ग़लत आकार का हो गया है।

और गहराई में

देवताओं और असुरों का एक जैसी प्रतिक्रिया देना वह ब्योरा है जिसे पढ़कर आगे निकल जाना आसान है, और वह असली काम कर रहा है।

यहाँ परम्परा की हर उस श्रेणी का नाम है जिसकी उसे परवाह है — उजले, काले, पितर, सिद्ध। सूची इसलिए है कि यह तय हो सके कि उनके बीच के भेद काम करना बन्द कर चुके हैं। इसके सामने कोई पक्ष सहज नहीं है और कोई पक्ष बाहर नहीं है। वे सब बस देख रहे हैं।

शास्त्र पढ़ने के उस ढंग पर यह चुपचाप एक उलाहना है जिसमें असल सवाल यह होता है कि आप किस तरफ़ हैं।

और अध्याय के इस हिस्से के गिने-चुने सचमुच दिलासा देने वाले स्वरों में यह एक है। जो भी हो रहा है वह किसी एक गुट के साथ नहीं हो रहा। जिस चीज़ से अर्जुन डरा हुआ है वह उसके दुश्मनों या उसके साथियों की चीज़ नहीं है, और तस्वीर में किसी को कोई बढ़त हासिल नहीं।