Gita Explained
कृष्ण कहते हैं16.2

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्।दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम्॥

ahinsā satyam akrodhas tyāgaḥ śāntir apaiśunamdayā bhūteṣv aloluptvaṃ mārdavaṃ hrīr acāpalam

शब्दार्थ
ahinsā - non-violencesatyam - truthfulnessakrodhaḥ - absence of angertyāgaḥ - renunciationśāntiḥ - peacefulnessapaiśunam - restraint from fault-findingdayā - compassionbhūteṣu - toward all living beingsaloluptvam - absence of covetousnessmārdavam - gentlenesshrīḥ - modestyacāpalam - lack of fickleness

श्लोक कहता है

किसी को चोट न पहुँचाना। सच। क्रोध नहीं। छोड़ देना। शान्ति। पीठ पीछे किसी को नीचा न दिखाना। हर जीव पर दया। लालच नहीं। कोमलता, लज्जा, और चंचलता का न होना।

सरल शब्दों में

सूची आगे बढ़ती है, और उसके बीच में एक अजीब चीज़ बैठी है।

अपैशुन - किसी को नीचा न दिखाना। उस आदमी के बारे में वह बात न कहना जो कमरे में नहीं है।

वह शान्ति और दया के बीच बैठी है, और ठीक वहीं उसकी जगह है। किसी को न मारना लगभग हर आदमी सँभाल लेगा। वह छोटी नुक़सान वाली बात हफ़्ते भर न कहना बहुत कम लोग सँभाल पाएँगे।

आपने इसे कहाँ महसूस किया है

आप चार लोग चाय पी रहे हैं और पाँचवाँ अभी आया नहीं। कोई शुरू करता है कि वह हमेशा देर से क्यों आता है और इससे उसके बारे में क्या पता चलता है। बात मज़ेदार है, बाक़ी भी जुड़ जाते हैं, और कोई भी बात झूठ नहीं है। फिर वह आता है और सब उससे गरमजोशी से मिलते हैं। उसके मुँह पर कुछ नहीं कहा गया और न कहा जाएगा। पर दस मिनट पहले की तुलना में वह चार लोगों के मन में थोड़ा छोटा हो चुका है, और उसे जवाब देने का मौक़ा कभी नहीं मिला।

और गहराई में

इस सूची के सारे गुणों में से, पीठ पीछे किसी को नीचा न दिखाना वह है जिसमें हममें से ज़्यादातर चुपचाप और बार-बार चूकते हैं।

अपैशुन का अर्थ है ख़बर न ढोना। यह निन्दा नहीं, जो झूठ है। यह पीठ पीछे कही गई सच्ची बात है, और इसीलिए यह कठिन है। किसी के बारे में झूठ बोलना कुछ लगता है। सही-सही की गई निर्दयता बातचीत जैसी लगती है।

और उसके दोनों ओर देखिए: एक तरफ़ शान्ति, दूसरी तरफ़ जीवों पर दया। इस आदत को शिष्टाचार के साथ नहीं, चोट के साथ रखा गया है।

कसौटी सीधी है और शुरू के कई मौक़ों पर लोग उसमें चूकते हैं। क्या वह वाक्य उस आदमी के कमरे में आ जाने पर टिक पाता? अगर नहीं, तो आप पहले से जानते हैं कि वह किस तरह का वाक्य था।