Gita Explained
कर्म का मार्ग - Kangra miniature

अध्याय ३ / १८

कर्म का मार्ग

कर्मयोगः

Karma Yoga · ४३ श्लोक

अर्जुन पूछता है कि यदि समझ कर्म से श्रेष्ठ है, तो मुझे इस भयानक युद्ध में क्यों धकेल रहे हैं? कृष्ण कहते हैं कि कर्म न करना किसी के वश में नहीं। चुप बैठना भी एक चुनाव है, जिसके परिणाम हैं। प्रश्न कभी यह था ही नहीं कि कर्म करें या नहीं, केवल यह कि किसके लिए करें।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

पीछे हट जाने का विकल्प बन्द हो जाता है। बिना पकड़ के किया गया कर्म संसार में रहने वालों के लिए व्यावहारिक मार्ग बन जाता है।

श्लोक

४३ / ४३ का अर्थ