Gita Explained
अर्जुन का टूट जाना — Kangra miniature

अध्याय / १८

अर्जुन का टूट जाना

अर्जुनविषादयोगः

Arjuna-viṣāda Yoga · ४७ श्लोक

दो सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं। अर्जुन अपने सारथी से कहता है कि रथ को दोनों के बीच ले चलो, ताकि वह देख सके कि उसे किससे लड़ना है। वह देखता है, और सबको पहचान लेता है — अपने गुरु, अपने भाई-बन्धु, वे लोग जिन्होंने उसे धनुष पकड़ना सिखाया। उसका शरीर जवाब दे जाता है। वह अपना धनुष रखकर रथ में बैठ जाता है।

यह अध्याय आपको कहाँ छोड़ता है

गीता का आरम्भ किसी उत्तर से नहीं, एक टूटन से होता है। इस अध्याय के अन्त तक कुछ भी हल नहीं होता — बस एक समर्थ व्यक्ति हिल-डुल पाने में असमर्थ हो जाता है। आगे जो कुछ है, वह इसी क्षण का उत्तर है।

श्लोक

१० / ४७ की व्याख्या